सम्राट महाराणा मैवाड़ श्री बप्पा रावल ( जो "काल भोज" के नाम से जाने जाते थे) जो मैवाड़ राजघराणे के पूवर्ज है , बप्पा रावल (शासनकाल 708-751) सूर्य वंशी सिसोदिया राजवंशमेवाड़ के प्रतापी शासक थे । विशाल रियासत की स्थापना आठवीं शताब्दी में बप्पारावल गुहिल वंश के सिसोदिया राजपूतों ने की थी। महाराणा बप्पा रावल को 'कालभोज' भी कहा जाता है। जनता ने बप्पा रावल के प्रजासंरक्षण, देशरक्षण आदि कामों से प्रभावित होकर ही इन्हे 'बापा' पदवी से विभूषित किया था, पश्चिम भारत के सिंध पश्चिमी कशमीर रावलपिंड़्डी कंधार ईरान आदि पश्चिमी भारत के जगहों पर अरबी लुटेरो के आतंक को रोकने में सफलता हासिल करने से भारतीय राजाओं के महासंघ निर्माण व राजनीतिक मोर्चा निर्माण द्वारा पश्चिमी भारत में सैनिक चौकियों व नये नगर गाँव बसाये गये इनमें सैनिक योद्धा परिवार बसाये गये ये योजना सफल रही व राहत मिली थी जो लगभग 400 वर्ष तक रही । महान काल भोज के समय तमाम छोटे राज्य मिलकर फिर एकता के सूत्र में स्वेच्छा से एक झंडे तले आ चुके थे जो विदेशी हमलावरो को रोक पाये थे । ज्ञात लेखों के अनुसार सन् 728 ई. में बप्पा रावल ने चित्तौड़गढ़ को राजपूताने पर राज्य करने वाले मौरी वंश के अंतिम शासक मान मोरी से दहेज में भैट लिए जाने के बाद गुहिलवंशीय मैवाड़ राज्य की स्थापना की। हालाँकि सम्राट बप्पा रावल की पहले से ही अनेक रानिया थी, मगर राजा मान मोरी ने काल भोज के अरब लुटेरो के खिलाफ सफल अभियान के बाद भविष्य में चितोड़ के नागरिकों व राज्य को शूरवीर के हाथ में देने की योजना के तहत ही बप्पा रावल से संधि व संबंध करके चितोड़ भेंट किया जिसमें बप्पा रावल ने चितोड़ दुर्ग का कीर्ती अमर हुई व भारत माता अगले 400 वर्ष तक सुरक्षित रहा । एक लिंग प्रशशती लेख से यह ज्ञात होता है कि बप्पा रावल की विशेष प्रसिद्धि अरबों से सफल युद्ध करने के कारण हुई। सन् 712 ई. में बप्पा रावल ने मुहम्मद बिन क़ासिम से सिंधु को जीता। अरबों के खिलाफ उसके बाद चारों ओर धावे करने शुरू किए। उन्होंने राजपूतो , व मोरी , सैंधवों, कच्छावा , परमारो , चौहानो , राष्कूट गहड़वालो , व स्थानीय नागरिकों गुर्जरों, जाटो आदि को मिलाकर एक विसाल सैन्य ताकत बनाई । मारवाड़, मालवा, मेवाड़, गुजरात पंजाब सिंध अफगानिस्तान ईरान खुरासान आदि सब भूभागों में उनकी सेनाएँ छा गईं। भारत के कुछ महान् राजा जिनमें विशेष रूप से प्रतिहार सम्राट् नागभट्ट प्रथम का काल 815 इशवी और बप्पा रावल के नाम उल्लेख्यनीय है नागभट्ट प्रथम ने अरबों को पश्चिमी राजस्थान और मालवा से मार भगाया। बापा ने यही कार्य 7 वी इस्वी मे ही सिंध से शुरू कर अफगानिस्तान ईरान उसके आसपास के प्रदेश के लिए किया। चित्तौड़ के राज मान मोरी शायद पहले अरब आक्रमण से जर्जर हो गए उन्होने शूरवीर बप्पा रावल से अपनी पुत्री का विवाह किया व चितोड़ का किला दहेज में भेंट किया । महान बापा ने वह कार्य किया जो मौरी करने में असमर्थ थे, और साथ ही चित्तौड़ से शासन करने लगे । बापा रावल के मुस्लिम देशों पर विजय की अनेक कथाएँ है ईरान खुरासान अफगानिस्तान सिंध आदि जगहों से लुटेरो को भगाया गया । रावल पिंड़ी शहर का नाम बप्पा रावल के नाम से ही है । जहां बहुत बड़ी सेनिक छावनी थी जहां से लुटेरो को भारत में घुसने से पहले ही रोका जाता था शायद इसलिए ही लगभग कई वर्षों तक भारत की रक्षा होती रही लाहोर आदि पुराने किले भी उसी योजना में बने थे । अगले 400 वर्ष तक कालांतर मैं उतार चढ़ाव के बीच केंद्रीय शासन बदलने से भारत में पुनः संकट आने लगे होंगे मगर हम कह सकते हैं कि सम्राट ( बप्पा रावल )काल भोज के नाम से अरब के लुटेरे कांपते थे । तभी तो भारत शताब्दियों तक शुरक्षित रहा । अजमेर आदि स्थान से बप्पा रावल शासन के सोने के सिक्के मिले है जिनपर भगवान शिव जी एकलिगं जी के चित्र त्रिशूल व गाय बछड़े के चित्र अंकित है । वहीं कई शिला लेखों व प्रचिन लिखे लेख भी उनके राज्य के बारे मे बताते हैं । बप्पा रावल के गुरु ऋषि हरित थे जो भगवान शिव के भक्त थे साथ ही गुरु हरित ऋषि के बताये स्थान पर खुदाई करके हजारों किलो सवर्ण राजा बप्पा रावल ने प्राप्त किया था ।
हिंदूधर्म संस्कृति को योगदान के लिए मैवाड़ के सम्राट काल भोज जैसे महान शूरवीर शिव भक्त ( एकलिगं जी) के भक्त राजपूत राजाओं का देश ऋणी रहेगा ।
हजार वर्ष बाद भी हिंदू रक्षको की किर्ती भारतीयों को एकता के सूत्र मे रहने को प्रेरित करती है । संभवत बप्पा रावल भी सातवाहन सम्राट विक्रमादित्य से प्रेरित रहे होंगे जिनके कारण यूनानी लुटेरे भारत से दूर भागते थे । वहीं भारत को एक करने मे महाराणा सांगा मैवाड़, महाराजा मालदेव जोधपुर, महाराजा मान सिंह आमेर, छत्रपति महाराज शिवाजी, गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज, आगे चलकर आधुनिक भारत में सरदार पटेल ने भी यही ऐकिरण करने का प्रयास किया ।
सम्राट बप्पा रावल कि प्रमुख उपलब्धियाँ:
भारत के प्रमुख राजाओं से संधि कर बड़ा सुरक्षा महासंघ बनाया पश्चिमी देशों के लुटेरो के खिलाफ प्राथमिकताओं को पहचानना सीखा महत्त्वपूर्ण आवश्यकता में महासंघ के अध्यक्ष पदाधिकारियों के लिए सर्व सहमति से चुनाव के नियम बनाये
1: भारत की 350 / 400 वर्षो तक पश्चिम सीमा सुरक्षित रही । लुटैरो का खुले में स्थापित नहीं हो सकें छुप कर आते वापस भागाये जाते रहे ।
2: गरीब व लाचार लाखों लोगों को गुलाम बनने से बचाव हुआ ज्ञात हो कि विदेशी लुटेरे कासिम आदि भारत के नागरिकों को गुलाम बनाकर बेचा करते थे बगदाद ईरान तुर्की आदि स्थान पर गुलाम मंडी हुआ करती थी ।
3: हिंदू जैन धर्म की रक्षा व संरक्षण में काल भोज बप्पा रावल के प्रयास अमर रहेंगे ।
4, विदेशी धर्म परिवर्तन को रोक लगी ज्ञात हो कि जबरन धर्म परिवर्तन विदेशी लुटेरो का एक बड़ा षड्यंत्र था । गुलाम मंडी के लिए जबरन दूर के देश विदेशियों को बेचने की प्रथा ईरान तेहरान ईराक बगदाद तुर्क अरबी मंडी आदि ।
5, युवा हिंदू राजाऔ की बाद की पीढ़ियों ने प्रेरणा लेकर समय समय पर राष्ट्र रक्षा युद्ध किये ।
महान सम्राट महाराणा बप्पा रावल "काल भोज " की कीर्ति सदैव याद रखी जाएगी ।
भारतीय युवाओं को अपने महान देश भक्त धर्म संस्कृति संस्कार आधयातमिक रक्षक हिन्दू प्रजा पालक राजाओं सम्राटो के योगदान को पहचानना सीखें ।
जय हिन्द वंदे मातरम
MSR
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2015